मेरी और मोहन की बातें, या मैं जानूँ या वो जाने ।
दिल की दुःख दर्द भरी बातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [1]
जब दिल में उनकी याद हुई, इक शक्ल नई ईज़ाद हुई ।
पल पल यह मस्त मुलाकातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [2]
नहीं जगता नहीं सोता हूँ, नहीं हँसता हूँ नहीं रोता हूँ ।
यह दर्दे जुदाई की रातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [3]
ग़म की घनघोर घटा गरजी, दामिनी वेदना की लरजी ।
दृग ‘बिन्दु’ भरी यह बरसातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [4]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
मेरी और मोहन के बीच की बातें या तो वे जानते हैं या मैं। मेरे दिल के दुख दर्द भरी बातें या तो वे जानते हैं या मैं। [1]
अब उनकी याद ह्रदय में एक रूप में परिवर्तित हो गई है। ये पल पल की मस्त मुलाक़ातें या तो वे जानते हैं या मैं। [2]
मैं न तो जागता हूँ और न ही सोता हूँ; मैं न रोता हूँ और न ही हँसता हूँ। ये दर्द भरी जुदाई की रातें या तो वे जानते हैं या मैं। [3]
दुख के घनघोर बादल गरजते हैं, और वेदना की बिजली चमकती है । उससे जो प्रेम भरे आंसुओं की बरसात होती है या तो वे जानते हैं या मैं। [4]
दिल की दुःख दर्द भरी बातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [1]
जब दिल में उनकी याद हुई, इक शक्ल नई ईज़ाद हुई ।
पल पल यह मस्त मुलाकातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [2]
नहीं जगता नहीं सोता हूँ, नहीं हँसता हूँ नहीं रोता हूँ ।
यह दर्दे जुदाई की रातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [3]
ग़म की घनघोर घटा गरजी, दामिनी वेदना की लरजी ।
दृग ‘बिन्दु’ भरी यह बरसातें, या मैं जानूँ या वो जाने ॥ [4]
- श्री बिंदु जी, मोहन मोहिनी
मेरी और मोहन के बीच की बातें या तो वे जानते हैं या मैं। मेरे दिल के दुख दर्द भरी बातें या तो वे जानते हैं या मैं। [1]
अब उनकी याद ह्रदय में एक रूप में परिवर्तित हो गई है। ये पल पल की मस्त मुलाक़ातें या तो वे जानते हैं या मैं। [2]
मैं न तो जागता हूँ और न ही सोता हूँ; मैं न रोता हूँ और न ही हँसता हूँ। ये दर्द भरी जुदाई की रातें या तो वे जानते हैं या मैं। [3]
दुख के घनघोर बादल गरजते हैं, और वेदना की बिजली चमकती है । उससे जो प्रेम भरे आंसुओं की बरसात होती है या तो वे जानते हैं या मैं। [4]

