सुनि धुनि मुरली बन बाजै - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (52)

सुनि धुनि मुरली बन बाजै - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (52)

(राग केदारौ व सारंग)
सुनि धुनि मुरली बन बाजै हरि रास रच्यौ ।
कुंज कुंज द्रुम बेलि प्रफुल्लित
मंडल कंचन मनिन खच्यौ ॥ [1]
नृत्तत जुगलकिसोर जुवति जन
मन मिलि राग केदारौ मच्यौ ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी

नीकै री आजु प्यारौ लाल नच्यौ ॥ [2]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (52)

अरी सखी! कुंजों में बज रही मुरली की धुन सुन, श्री हरि ने रास रचाया है । प्रत्येक कुंज में वृक्ष एवं लताएँ प्रफुल्लित हैं एवं रास मण्डल सोने एवं मणियों से जटित है । [1]

श्री युगल किशोर आज सहचरियों के संग सुंदर नित्य कर रहे हैं एवं सुंदर राग केदारौ से पूर्ण वातावरण गूंज उठा है । स्वामी श्री हरिदास के स्वामी श्री श्यामा कुंज बिहारी ने आज सुंदर एवं उत्कृष्ट नृत्य दिखाया है ।  [2]