(कवित्त)
तारिहौ न स्याम तो किसोरी की अदालत में,
नेह का बकील कर नालिश लगायेंगे। [1]
वायदा सदा तारने का किया घनश्याम तुम,
अब इन्कार यही दावा लिखायेंगे॥ [2]
दावा के जवाब में कहोगे गर पातकी है,
तो अनेक पापियों की नज़ीर दिखलायेंगे। [3]
एते हू पै तारोगे जो नाहीं घनश्याम जू,
तो कोष करुणा का सब कुड़क करायेंगे॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
हे श्यामसुन्दर, यदि तुम हमको तारोगे नहीं तो हम श्री किशोरी जी (श्री राधा) की अदालत में जाएँगें, और प्रेम का वकील करके तुम पर मुक़दमा ठोक देंगें। [1]
हम यही दावा पेश करेंगे कि तुमने तो किशोरीजी (श्री राधा) की शरण में रहने वाले जीव को सदा तारने का वादा किया था, अब तुम इससे मुकर रहे हो। [2]
यदि तुम इस दावे के जवाब में कहोगे कि यह जीव तो पापी है और मैं इसका उद्धार कैसे करूँ, तो हम अनेक पापियों के उदाहरण तुम्हें गिनायेंगे जिनका उद्धार तुमने किया है। [3]
यदि तुम ऐसे भी नहीं मानोगे और हमें तारने से इनकार कर दोगे, तो हम तुम्हारे करुणा के भंडार (करुणासागर आदि) होने वाली उपाधि को ख़ारिज करवा देंगे। [4]
तारिहौ न स्याम तो किसोरी की अदालत में,
नेह का बकील कर नालिश लगायेंगे। [1]
वायदा सदा तारने का किया घनश्याम तुम,
अब इन्कार यही दावा लिखायेंगे॥ [2]
दावा के जवाब में कहोगे गर पातकी है,
तो अनेक पापियों की नज़ीर दिखलायेंगे। [3]
एते हू पै तारोगे जो नाहीं घनश्याम जू,
तो कोष करुणा का सब कुड़क करायेंगे॥ [4]
- ब्रज के कवित्त
हे श्यामसुन्दर, यदि तुम हमको तारोगे नहीं तो हम श्री किशोरी जी (श्री राधा) की अदालत में जाएँगें, और प्रेम का वकील करके तुम पर मुक़दमा ठोक देंगें। [1]
हम यही दावा पेश करेंगे कि तुमने तो किशोरीजी (श्री राधा) की शरण में रहने वाले जीव को सदा तारने का वादा किया था, अब तुम इससे मुकर रहे हो। [2]
यदि तुम इस दावे के जवाब में कहोगे कि यह जीव तो पापी है और मैं इसका उद्धार कैसे करूँ, तो हम अनेक पापियों के उदाहरण तुम्हें गिनायेंगे जिनका उद्धार तुमने किया है। [3]
यदि तुम ऐसे भी नहीं मानोगे और हमें तारने से इनकार कर दोगे, तो हम तुम्हारे करुणा के भंडार (करुणासागर आदि) होने वाली उपाधि को ख़ारिज करवा देंगे। [4]

