(राग विहागरौ)
रंग भरयौ लालन रंगीली प्यारी राधा ।
एक तन एक मन एक ही समान दोऊ,
नेक हूँ न न्यारे ह्वै सकत पल आधा ॥ [1]
छबि सों छबीली भाँति नैनन में मुसकाति,
मुसकन ही में रंग बढ़यौ है अगाधा ।
तैसीयै ‘नवल’ सखी तैसीयै कुंज बिहारी
तैसी मेरी प्राण प्यारी पूजी मन साधा ॥ [2]
- श्री नवल देव जी, श्री नवलदेव जी की वाणी (7)
रंगीली श्री राधा श्री लाल जी के ह्रदय में प्रेम के रंग भरती हैं । श्री प्रिया लाल का एक ही तन और मन है एवं दोनों एक समान ही हैं । वे दोनों एक क्षण के लिए भी दूसरे से विलग नहीं होते । [1]
जिनकी छवि अत्यंत मनमोहक है, जो नैनों में मुस्कुराती है एवं मुस्कान मुस्कान में ही प्रेम का अगाध रंग भर देती हैं । ऐसे ही नित्य नवीन सखी है, कुंज बिहारी हैं और समस्त ह्रदय की आकांक्षाओं को पूर्ण करने वाली मेरी प्राण प्यारी कुंज बिहारिनी हैं । [2]
रंग भरयौ लालन रंगीली प्यारी राधा ।
एक तन एक मन एक ही समान दोऊ,
नेक हूँ न न्यारे ह्वै सकत पल आधा ॥ [1]
छबि सों छबीली भाँति नैनन में मुसकाति,
मुसकन ही में रंग बढ़यौ है अगाधा ।
तैसीयै ‘नवल’ सखी तैसीयै कुंज बिहारी
तैसी मेरी प्राण प्यारी पूजी मन साधा ॥ [2]
- श्री नवल देव जी, श्री नवलदेव जी की वाणी (7)
रंगीली श्री राधा श्री लाल जी के ह्रदय में प्रेम के रंग भरती हैं । श्री प्रिया लाल का एक ही तन और मन है एवं दोनों एक समान ही हैं । वे दोनों एक क्षण के लिए भी दूसरे से विलग नहीं होते । [1]
जिनकी छवि अत्यंत मनमोहक है, जो नैनों में मुस्कुराती है एवं मुस्कान मुस्कान में ही प्रेम का अगाध रंग भर देती हैं । ऐसे ही नित्य नवीन सखी है, कुंज बिहारी हैं और समस्त ह्रदय की आकांक्षाओं को पूर्ण करने वाली मेरी प्राण प्यारी कुंज बिहारिनी हैं । [2]

