कृपा करो वृन्दावन रानी  - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (8)

कृपा करो वृन्दावन रानी - श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (8)

(राग बिलावल)
कृपा करो वृन्दावन रानी ।
महिमा अमित अगाध न जानौं, नेति नेति कहि वेद बखानि ॥ [1]
तुम हौ परम उदार स्वामिनी, मनमोहन के प्राण समानी ।
“ब्रजनिधि” कौ अपनौ करि लीजै, दीजै वृन्दावन रजधानी ॥ [2]

- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (8)

हे वृंदावन की महारानी, श्री राधा रानी, मुझ पर कृपा कीजिए । तुम्हारी महिमा अगाध एवं अपरंपार है जिसका पार वेद भी नहीं पा सकते अत: वे नेती नेती कह कर वर्णन करते हैं । [1]

तुम परम उदार स्वामिनी हो, एवं मनमोहन कृष्ण चन्द्र को प्राणों से भी अधिक प्रिय हो । श्री ब्रजनिधि कहते हैं कि मुझको भी अपना बना लीजिए एवं अपनी राजधानी श्री वृंदावन धाम में वास प्रदान कीजिए । [2]