जय कुँवरि लड़ैती करुणानिधि - श्री सरस माधुरी जी

जय कुँवरि लड़ैती करुणानिधि - श्री सरस माधुरी जी

(राग ठूमरी, सोरठ)
जय कुँवरि लड़ैती करुणानिधि, जै अलबेली सुकुमारी की ।
जै रसनिधि गुननिधि दयानिधे, जै कृपासमुद्र अपारी की ॥ [1]
जै पतितन पावन करन प्रिये, जै शरणागत- भयहारी की ।
जै निरधारन आधार लली, जै अधम उधारन वारी की ॥ [2]
जै शशि वदनी शोभा सदनी, सुखदायक सरस विहारी की ।
जै 'सरसमाधुरी' छबि रासी, श्यामा सरदार हमारी की ॥ [3]

- श्री सरस माधुरी जी

करुणा की निधि कुँवरी लड़ैती (श्री राधा) की जय हो ; अलबेली सरकार की जय हो । रस की निधि, गुण की निधि, दया की निधि, अपार कृपा की समुद्र की जय हो । [1]

पतित पावनी श्री राधा की जय हो, शरणागत को अभय प्रदान करने वाली की जय हो । निराधार की आधार की जय हो, अधमों का उद्धार करने वाली की जय हो । [2]

चन्द्र समान मुख वाली की जय हो, शोभा की सदन की जय हो, एवं सरस विहार कर सुख प्रदान करने वाली की जय हो  । सरस माधुरी की स्वामिनी श्यामा जू (श्री राधा) की जय हो जो सुंदरता की राशि हैं एवं जो सब सखियों की सरदार हैं ।  [3]