यस्यास्ते बत किंकरीषु - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (93)

यस्यास्ते बत किंकरीषु - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (93)

यस्यास्ते बत किंकरीषु वहुशश्चाटूनि वृन्दाटवी,
कन्दर्पः कुरुते तवैव किमपि प्रेप्सुः प्रसादोत्सवम् ।
सान्द्रानन्द घनानुराग-लहरी निस्यंदि पादाम्बुज,
द्वन्द्वे श्रीवृषभानुनन्दिनि सदा वन्दे तव श्रीपदम् ॥

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (93)

वृन्दाटवी कन्दर्प श्रीलालजी श्री राधिका के प्रसादोत्सव की इच्छा से उनकी किंकरियों की अत्यन्त हर्ष-पूर्वक अधिकाधिक सदा चाटुकारिता करते रहते हैं । आपके जिन युगल चरण-कमलों से सदा ही घनीभूत आनन्द एवं अनुराग की लहरें प्रवाहित होती रहती है, हे वृषभानुनन्दिनि ! मैं आपके उन्हीं श्रीचरणों की सदा बन्दना करती हूँ ।