है न्यारो सब पंथ ते प्रेम पंथ अभिराम ।
नारायण यामें चलत, वेगि मिलै पिय धाम ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (156)
संसार के समस्त मार्गों और मत-मतांतरों से प्रेम का यह मार्ग अत्यंत विलक्षण और सुखद है। इस अनुराग के पथ पर अग्रसर होने वाला साधक अति शीघ्र ही अपने प्रियतम के परम धाम को प्राप्त कर लेता है।
नारायण यामें चलत, वेगि मिलै पिय धाम ॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (156)
संसार के समस्त मार्गों और मत-मतांतरों से प्रेम का यह मार्ग अत्यंत विलक्षण और सुखद है। इस अनुराग के पथ पर अग्रसर होने वाला साधक अति शीघ्र ही अपने प्रियतम के परम धाम को प्राप्त कर लेता है।

