श्यामा प्रबल सहाय हमारी ।
जा डर ब्रह्म इंद्र शिव डरपत सो डरपत जासों कुंज बिहारी ॥ [1]
जो श्री हरि प्रहलाद अभय किये खंभ फारि कर प्रगट पधारी ।
जाके डर डरपत बेहू मोहन सो स्वामिनि मम भानुदुलारी ॥ [2]
जय जय प्रबल निकुंज धाम के ठकुरानी मनमानि बिहारी ।
सब बल प्रबल सदा 'नरहरि अलि' पीवत तेरोइ नाम सुधारी ॥ [3]
- श्री नरहरि अली
हमारी सर्वसमर्थ स्वामिनी श्री श्यामा जू [राधा] अति ही सहायक हैं । जिसके डर से ब्रह्मा, इंद्र, शिव आदि भी डरते हैं वो साक्षात डर भी भगवान श्री कृष्ण से डरता है । [1]
श्री हरि ने प्रह्लाद को खम्बे से प्रकट होकर अभय प्रदान किया था । ऐसे सर्वशक्तिमान श्री हरि (कृष्ण) भी जिनके डर से सदा डरते हैं वे मेरी स्वामिनी, भानुदुलारी श्री राधा हैं । [2]
मेरी निकुंज धाम की ठकुरानी सदा बिहारीजी संग मनमानी क्रीड़ा करती हैं । श्री नरहरि अलि जी कहते हैं कि ऐसी स्वामिनी जू के बल के प्रताप से प्रबल होकर मैं सदा उनके नाम का सुधा (अमृत) रस पीता रहता हूँ । [3]
जा डर ब्रह्म इंद्र शिव डरपत सो डरपत जासों कुंज बिहारी ॥ [1]
जो श्री हरि प्रहलाद अभय किये खंभ फारि कर प्रगट पधारी ।
जाके डर डरपत बेहू मोहन सो स्वामिनि मम भानुदुलारी ॥ [2]
जय जय प्रबल निकुंज धाम के ठकुरानी मनमानि बिहारी ।
सब बल प्रबल सदा 'नरहरि अलि' पीवत तेरोइ नाम सुधारी ॥ [3]
- श्री नरहरि अली
हमारी सर्वसमर्थ स्वामिनी श्री श्यामा जू [राधा] अति ही सहायक हैं । जिसके डर से ब्रह्मा, इंद्र, शिव आदि भी डरते हैं वो साक्षात डर भी भगवान श्री कृष्ण से डरता है । [1]
श्री हरि ने प्रह्लाद को खम्बे से प्रकट होकर अभय प्रदान किया था । ऐसे सर्वशक्तिमान श्री हरि (कृष्ण) भी जिनके डर से सदा डरते हैं वे मेरी स्वामिनी, भानुदुलारी श्री राधा हैं । [2]
मेरी निकुंज धाम की ठकुरानी सदा बिहारीजी संग मनमानी क्रीड़ा करती हैं । श्री नरहरि अलि जी कहते हैं कि ऐसी स्वामिनी जू के बल के प्रताप से प्रबल होकर मैं सदा उनके नाम का सुधा (अमृत) रस पीता रहता हूँ । [3]

