रूप दृगन स्रवनन सुजस - श्री रस निधि जी

रूप दृगन स्रवनन सुजस - श्री रस निधि जी

रूप दृगन स्रवनन सुजस, रसना में हरिनाम ।
रसनिधि मन में नित बसैं, चरन कमल अभिराम ॥

- श्री रसनिधि

मेरे नेत्रों में श्री कृष्ण का स्वरूप, कानों में उनका गुणगान, जिह्वा में उनका नाम और मन में उनके सुंदर चरण-कमल सदा निवास करें।