श्रीराधारमण हमारे मीत ।
ललित त्रिभंगी श्यामसलौने, कटि-पहिरे पट पीत ॥ [1]
मुरलीधर मन हरन छबीले, छके-प्रिया की प्रीत ।
‘गुण मंजरी’ विदित नागर वर, जानत रस की रीत ॥ [2]
- श्री गुणमंजरी दास
ललित त्रिभंगी, श्याम वर्ण वाले, सुंदर कटि एवं पीले वस्त्र धारण करने वाले श्री राधारमण लाल ही हमारे साँचे मीत हैं । [1]
जिनके हाथों में मुरली सुशोभित है, जो सबके मन का हरण करते हैं, जिनकी छवि सुंदर है और जो सदा श्री प्रियाजी [राधा] के प्रेम में छके रहते हैं । श्री गुणमंजरी’ दास जी कहते हैं कि वे नटनागर रसिकवर हैं जो रस की रीति को भलीभाँति जानते हैं । [2]
ललित त्रिभंगी श्यामसलौने, कटि-पहिरे पट पीत ॥ [1]
मुरलीधर मन हरन छबीले, छके-प्रिया की प्रीत ।
‘गुण मंजरी’ विदित नागर वर, जानत रस की रीत ॥ [2]
- श्री गुणमंजरी दास
ललित त्रिभंगी, श्याम वर्ण वाले, सुंदर कटि एवं पीले वस्त्र धारण करने वाले श्री राधारमण लाल ही हमारे साँचे मीत हैं । [1]
जिनके हाथों में मुरली सुशोभित है, जो सबके मन का हरण करते हैं, जिनकी छवि सुंदर है और जो सदा श्री प्रियाजी [राधा] के प्रेम में छके रहते हैं । श्री गुणमंजरी’ दास जी कहते हैं कि वे नटनागर रसिकवर हैं जो रस की रीति को भलीभाँति जानते हैं । [2]

