मिल्यौ सबै कछु जो -  श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (15)

मिल्यौ सबै कछु जो - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (15)

मिल्यौ सबै कछु जो कभूँ मान्यौ आपनि हाल ।
जो न मिल्यौ या धाम सौं रह्यौ हीयें दृढ़ साल ॥

- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (15)

वृंदावन रस का उपासक कहता है कि चाहे सब कुछ क्यों न मिल जाए परंतु यदि श्री वृंदावन धाम न मिले तो हृदय की दृढ़ पीड़ा बनी ही रहती है।