(कवित्त)
जाकैं लियें सिन्धु मथ्यौ करि के जु श्रम भारी,
ताकी छटा जग में भई प्रकाशमान हैं। [1]
तन सुख त्यागैं नर ताकैं काज तप करैं,
देव औ अदेव चहैं कृपा सरसान हैं॥ [2]
ब्रह्म विश्व जानी वैकुण्ठरानी सर्वोपर,
"नागर" कहाँ लौं करौं प्रभुता बखान हैं। [3]
ऐसी ये रमा सो ताके पायन पलोटैं,
सो तो राधा पद जावक की सेवा में सुजान हैं॥ [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, ब्रज सार (23)
समुद्र मंथन के भारी श्रम के बाद ही समुद्र से श्री लक्ष्मी देवी निकली थी जिनकी छवि इस जग में प्रकाशित है। [1]
समस्त जीव लक्ष्मीजी की कृपा (धन) को प्राप्त करने के लिए ही सब प्रकार से, तन के सुखों का त्याग कर, उनके पीछे लगे रहते हैं। चाहें देव हों या राक्षस हों दोनों इनकी कृपा चाहते हैं। [2]
विश्व के प्राणी ऐसी वैकुण्ठ रानी (महालक्ष्मी) को ही सर्वोपरि मानते हैं। श्री नागरीदास जी कहते हैं कि ऐसी लक्ष्मी जी की प्रभुता मैं कहाँ तक बखान करूँ। [3]
जो रमा [लक्ष्मी] जी नित्य ही जिन श्री हरि के चरणों को दबाती रहती हैं, वही श्री हरि (श्री कृष्ण) श्री राधा के चरणों में जावक (मेंहदी) लगाते हैं एवं सदा श्री राधा महारानी की चरण सेवा करते रहते हैं। [4]
जाकैं लियें सिन्धु मथ्यौ करि के जु श्रम भारी,
ताकी छटा जग में भई प्रकाशमान हैं। [1]
तन सुख त्यागैं नर ताकैं काज तप करैं,
देव औ अदेव चहैं कृपा सरसान हैं॥ [2]
ब्रह्म विश्व जानी वैकुण्ठरानी सर्वोपर,
"नागर" कहाँ लौं करौं प्रभुता बखान हैं। [3]
ऐसी ये रमा सो ताके पायन पलोटैं,
सो तो राधा पद जावक की सेवा में सुजान हैं॥ [4]
- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, ब्रज सार (23)
समुद्र मंथन के भारी श्रम के बाद ही समुद्र से श्री लक्ष्मी देवी निकली थी जिनकी छवि इस जग में प्रकाशित है। [1]
समस्त जीव लक्ष्मीजी की कृपा (धन) को प्राप्त करने के लिए ही सब प्रकार से, तन के सुखों का त्याग कर, उनके पीछे लगे रहते हैं। चाहें देव हों या राक्षस हों दोनों इनकी कृपा चाहते हैं। [2]
विश्व के प्राणी ऐसी वैकुण्ठ रानी (महालक्ष्मी) को ही सर्वोपरि मानते हैं। श्री नागरीदास जी कहते हैं कि ऐसी लक्ष्मी जी की प्रभुता मैं कहाँ तक बखान करूँ। [3]
जो रमा [लक्ष्मी] जी नित्य ही जिन श्री हरि के चरणों को दबाती रहती हैं, वही श्री हरि (श्री कृष्ण) श्री राधा के चरणों में जावक (मेंहदी) लगाते हैं एवं सदा श्री राधा महारानी की चरण सेवा करते रहते हैं। [4]

