तेरे बने बिनु जीना जीना नहिं श्यामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (151)

तेरे बने बिनु जीना जीना नहिं श्यामा - जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (151)

तेरे बने बिनु जीना जीना नहिं श्यामा।
यूँ तो पेट भर लेते शूकर ग्रामा॥

- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज, श्यामा श्याम गीत (151)

हे श्यामा [श्री राधा]! तुम्हारे बने बिना जीवन भी भला कोई जीवन है (अर्थात् व्यर्थ है)। यूँ तो पेट सूअर आदि भी भर लेते हैं। यदि तुमसे न मिले तो इस मानव जीवन का उद्देश्य ही क्या है?