श्री वृन्दावन कुञ्ज में, करत सुधा रस पान ।
नागर नवलकिसोर वर, सुन्दर परम सुजान ॥
- श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (54)
परम लावण्यमयी नवल किशोर जोड़ी श्रीश्यामा-श्याम श्रीवृंदावन के सघन कुंजों में नित्य विहार करते हुए अनवरत प्रेम-सुधा का रसास्वादन कर रहे हैं।
नागर नवलकिसोर वर, सुन्दर परम सुजान ॥
- श्री रूप सखी, श्रृंगार रस के दोहे (54)
परम लावण्यमयी नवल किशोर जोड़ी श्रीश्यामा-श्याम श्रीवृंदावन के सघन कुंजों में नित्य विहार करते हुए अनवरत प्रेम-सुधा का रसास्वादन कर रहे हैं।

