मोहि श्यामा प्यारी कब अपनावौगी ॥ [1]
तुव पद आस भरोस एक कब हिया सिरावौगी ।
अदुभुत रूप अनूप तिहारो मम नयन बसावौगी ॥ [2]
सुंदर तुव गुन गान केलि रस श्रवन सुनावौगी ।
कर पद सिर सब अंग आपकी सेवा करावौगी ॥ [3]
गौर श्याम तब अंग अंग छवि मन मधुप रमावौगी ।
अलि माधुरी की अर्ज़ी यह सुन हरखावौगी ॥ [4]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (3)
हे श्यामा प्यारी [श्री राधे], मुझे तुम कब अपना बना लोगी? [1]
मुझे तो अनन्य भाव से केवल तुम्हारे चरणों का ही एक बल है, अत: मेरे ह्रदय को कब शीतल करोगी ? कब ऐसी कृपा होगी कि मेरे नैनों में सदा सदा के लिए तुम्हारा अद्भुत एवं अनूप रूप बस जाएगा । [2]
हे प्यारी जू! तुम्हारा यशोगान मनमोहक है, कब मैं तुम्हारी केली रस से पूर्ण वार्ता को सुनूँगा ? कब तुम अपनी कृपा से निज हाथों की, चरणों की, सिर की, एवं सब अंगों की सेवा मुझसे करवाओगी? [3]
कब दिव्य युगल की गौर श्यामल रंग की कांति की छवि मेरे मधुप मन में रम जाएगी ? श्री अली माधुरी जी कहते हैं कि कब मेरी विनती सुनकर तुम्हारा ह्रदय प्रसन्न होगा । [4]
तुव पद आस भरोस एक कब हिया सिरावौगी ।
अदुभुत रूप अनूप तिहारो मम नयन बसावौगी ॥ [2]
सुंदर तुव गुन गान केलि रस श्रवन सुनावौगी ।
कर पद सिर सब अंग आपकी सेवा करावौगी ॥ [3]
गौर श्याम तब अंग अंग छवि मन मधुप रमावौगी ।
अलि माधुरी की अर्ज़ी यह सुन हरखावौगी ॥ [4]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, श्यामा जू की विनय पत्रिका (3)
हे श्यामा प्यारी [श्री राधे], मुझे तुम कब अपना बना लोगी? [1]
मुझे तो अनन्य भाव से केवल तुम्हारे चरणों का ही एक बल है, अत: मेरे ह्रदय को कब शीतल करोगी ? कब ऐसी कृपा होगी कि मेरे नैनों में सदा सदा के लिए तुम्हारा अद्भुत एवं अनूप रूप बस जाएगा । [2]
हे प्यारी जू! तुम्हारा यशोगान मनमोहक है, कब मैं तुम्हारी केली रस से पूर्ण वार्ता को सुनूँगा ? कब तुम अपनी कृपा से निज हाथों की, चरणों की, सिर की, एवं सब अंगों की सेवा मुझसे करवाओगी? [3]
कब दिव्य युगल की गौर श्यामल रंग की कांति की छवि मेरे मधुप मन में रम जाएगी ? श्री अली माधुरी जी कहते हैं कि कब मेरी विनती सुनकर तुम्हारा ह्रदय प्रसन्न होगा । [4]

