(राग भैंरु आड़ ताल)
जनम लीयौ श्री राधा प्यारी ।
रूप रासि अंग अंगमाधुरी, कही न जात कछू सुन्दरतारी ॥ [1]
अष्ट सिद्धि नवनिद्ध मुक्ति सब, रमा उमालै सगरी नारी ।
ह्वै ब्रषभानु लली की चेरी, मानत धन्य भाग बढ़ भारी ॥ [2]
जबते अमंगल सगरे नासे, मंगल की भई अधिक उज्यारी ।
'किशोरी दास’ वृजचन्द्र चन्द्रिका, प्रगट भई सुख निध सुकमारी ॥ [3]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
श्री राधा प्यारी प्रकट हुई हैं, जो रूप की राशि हैं जिनके प्रत्येक अंगों की माधुरी परम अद्भुत है जिसका वर्णन करना असंभव है । [1]
लक्ष्मी, पार्वती एवं समस्त दिव्य शक्तियाँ, अष्ट सिद्धियों एवं नौ निधियों, मुक्ति आदि को लेकर उनके दर्शन करने आयी हैं । वृषभानु दुलारी श्री राधा की दासी बनकर स्वयं को भाग्यशाली मान रही हैं । [2]
समस्त अमंगल का नाश हुआ और परम मंगल की अब तिथि आयी है । श्री किशोरी दास कहते हैं कि, "ब्रजचन्द्र की चंद्रिका, सुख की निधि, परम सुकुमारी, श्री राधा प्यारी प्रकट हुई हैं " । [3]
जनम लीयौ श्री राधा प्यारी ।
रूप रासि अंग अंगमाधुरी, कही न जात कछू सुन्दरतारी ॥ [1]
अष्ट सिद्धि नवनिद्ध मुक्ति सब, रमा उमालै सगरी नारी ।
ह्वै ब्रषभानु लली की चेरी, मानत धन्य भाग बढ़ भारी ॥ [2]
जबते अमंगल सगरे नासे, मंगल की भई अधिक उज्यारी ।
'किशोरी दास’ वृजचन्द्र चन्द्रिका, प्रगट भई सुख निध सुकमारी ॥ [3]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
श्री राधा प्यारी प्रकट हुई हैं, जो रूप की राशि हैं जिनके प्रत्येक अंगों की माधुरी परम अद्भुत है जिसका वर्णन करना असंभव है । [1]
लक्ष्मी, पार्वती एवं समस्त दिव्य शक्तियाँ, अष्ट सिद्धियों एवं नौ निधियों, मुक्ति आदि को लेकर उनके दर्शन करने आयी हैं । वृषभानु दुलारी श्री राधा की दासी बनकर स्वयं को भाग्यशाली मान रही हैं । [2]
समस्त अमंगल का नाश हुआ और परम मंगल की अब तिथि आयी है । श्री किशोरी दास कहते हैं कि, "ब्रजचन्द्र की चंद्रिका, सुख की निधि, परम सुकुमारी, श्री राधा प्यारी प्रकट हुई हैं " । [3]

