मोरौ मुख घर ओर सों तोरौ भव के जाल - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (9)

मोरौ मुख घर ओर सों तोरौ भव के जाल - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (9)

मोरौ मुख घर ओर सों, तोरौ भव के जाल ।
छोरौ सब साधन सुनौ, भजौ एक नंदलाल ॥

- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (9)

अपने सांसारिक घर की वासनाओं से मुख मोड़कर, भव के जाल (सांसारिक झंझटों) को तोड़कर, समस्त साधनों को त्याग कर, एक नंदलाल श्री कृष्ण का निष्काम एवं निष्कपट भाव से भजन करो।