(सवैया)
सर्प डसे सु नहीं कछु तालुक, बीछू लगे सु भलौ करि मानो।
सिंह हु खाय तौ नाहिं कछू डर, जो गज मारत तौ नहिं हानो॥ [1]
आगि जरौ जल बूड़ि मरौ गिरि, जाय गिरौ कछू भय मति आनो।
‘सुन्दर’ और भले सब ही दुख, दुर्ज्जन संग भलो जनि जानो॥ [2]
- श्री सुंदर जी
यदि साँप डस ले या बिच्छू डंक मार दे, तो भी समझो कि अभी भला ही हुआ है।
यदि सिंह खा जाए या हाथी मार दे, तो भी कोई हानि नहीं है। [1]
यदि आग में जलकर, पानी में डूबकर या पहाड़ से गिरकर मरना पड़े, तो भी डरने की आवश्यकता नहीं।
सुंदर जी कहते हैं कि इतना सब कुछ हो तो भी यह समझो कि सब कुछ भले के लिए ही होता है, परंतु यदि किसी दुष्ट व्यक्ति का संग मिल गया, तो समझ लो कि इससे बड़ी हानि नहीं हो सकती। [2]
सर्प डसे सु नहीं कछु तालुक, बीछू लगे सु भलौ करि मानो।
सिंह हु खाय तौ नाहिं कछू डर, जो गज मारत तौ नहिं हानो॥ [1]
आगि जरौ जल बूड़ि मरौ गिरि, जाय गिरौ कछू भय मति आनो।
‘सुन्दर’ और भले सब ही दुख, दुर्ज्जन संग भलो जनि जानो॥ [2]
- श्री सुंदर जी
यदि साँप डस ले या बिच्छू डंक मार दे, तो भी समझो कि अभी भला ही हुआ है।
यदि सिंह खा जाए या हाथी मार दे, तो भी कोई हानि नहीं है। [1]
यदि आग में जलकर, पानी में डूबकर या पहाड़ से गिरकर मरना पड़े, तो भी डरने की आवश्यकता नहीं।
सुंदर जी कहते हैं कि इतना सब कुछ हो तो भी यह समझो कि सब कुछ भले के लिए ही होता है, परंतु यदि किसी दुष्ट व्यक्ति का संग मिल गया, तो समझ लो कि इससे बड़ी हानि नहीं हो सकती। [2]

