मोहन अद्भुत रूप कहि न आवत छबि ताकी ।
अखिल खण्ड व्यापी जु ब्रह्म आभा है जाकी ॥
- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (34)
अनंत कोटि ब्रह्मांड के कण कण में ब्रह्म स्वरूप से व्याप्त, मन को मोहने वाले श्री कृष्ण चन्द्र की रूप माधुरी ऐसी है जिसका वर्णन शब्दों में करना असंभव है।
अखिल खण्ड व्यापी जु ब्रह्म आभा है जाकी ॥
- श्री नंद दास, नंद दास ग्रंथावली, रास पंचाध्यायी, श्री वृंदावन वर्णन (34)
अनंत कोटि ब्रह्मांड के कण कण में ब्रह्म स्वरूप से व्याप्त, मन को मोहने वाले श्री कृष्ण चन्द्र की रूप माधुरी ऐसी है जिसका वर्णन शब्दों में करना असंभव है।

