राधा राधेति राधेति राधाकृष्णेति वै पुन: ।
प्रत्यहं पठ पाञ्चालि फलं नाम सहस्रकम् ॥
- बृहन्नारदीय पुराण
हे द्रौपदी! “राधा! राधा!, राधा कृष्ण!” - इन नामों का सदैव बार बार उच्चारण करो, कीर्तन करो क्योंकि एक बार “राधा" कहने से श्री विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ का फल मिलता है ।
प्रत्यहं पठ पाञ्चालि फलं नाम सहस्रकम् ॥
- बृहन्नारदीय पुराण
हे द्रौपदी! “राधा! राधा!, राधा कृष्ण!” - इन नामों का सदैव बार बार उच्चारण करो, कीर्तन करो क्योंकि एक बार “राधा" कहने से श्री विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ का फल मिलता है ।

