जयति गुन गामिनी रसिक अभिरामिनी - श्री सरस माधुरी जी

जयति गुन गामिनी रसिक अभिरामिनी - श्री सरस माधुरी जी

(राग आसावारी)
जयति गुन गामिनी, रसिक अभिरामिनी,
सकल चूड़ामनी परम भोरी । [1]
जयति रस रासिनी, विपिन वर वासिनी,
हिय की हुलासिनी वयसि थोरी ॥ [2]
जयति दुख नासिनी, पिय हिय वासिनी,
मंद मुख हासिनी प्रेम डोरी । [3]
जयति मुख चंदनी रसिक पिय फंदनी,
'सरस' आनंदनी शरन तोरी ॥ [4]

- श्री सरस माधुरी

समस्त गुणों की ख़ान, रसिकों के मन को मोहने वाली मनोहारिणी, सर्व शिरोमणि, परम भोली श्री राधा की जय हो । [1]

रास रस को बरसाने वाली, वनों में सर्वश्रेष्ठ श्री धाम वृंदावन में वास करने वाली, सदा प्रसन्नचित्त एवं किशोर अवस्था में रहने वाली श्री राधा किशोरी की जय हो । [2]

दुखों का नाश करने वाली, अपने प्रियतम श्यामसुन्दर के ह्रदय में निवास करने वाली, मंद मंद मुसकाने वाली, एवं प्रेम की डोरी से अपने भक्तों को बांधने वाली श्री राधा की जय हो । [3]

चंद्रमा के चाँदनी के समान उज्जवल मुख वाली, रसिक प्रियतम श्यामसुन्दर को प्रेम से वशीभूत करने वाली, सरस रस बरसाने वाली, सरस माधुरी जी की स्वामिनी, श्री राधा की जय हो । [4]