आन देवसों काज ना ना किहु निंदा गोय - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (57)

आन देवसों काज ना ना किहु निंदा गोय - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (57)

आन देवसों काज ना, ना किहु निंदा गोय ।
युगल चरण विश्वास दृढ़, होनी होय सो होय ॥

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (57)

वृंदावन के रस उपासक को श्री राधा कृष्ण के अतिरिक्त अन्य किसी देवता से कोई संबंध नहीं रखना चाहिए और न ही कभी किसी की निंदा ही करनी चाहिए। केवल युगल चरणों पर ही अनन्य विश्वास रखकर पूर्ण रूप से बेपरवाही में रहना चाहिए।