राधिकानुचरीं नित्य तत् सेवन परायणाम ।
कृष्णादप्यधिकं प्रेम राधिकायां प्रकुर्वतीम ॥
- सनत्कुमार संहिता (36.186)
शिवजी नारद जी से बोले: श्री राधिका की अनुचरी बनकर श्री राधिका की नित्य सेवा परायण रहकर, श्री कृष्ण से भी अधिक प्रेम श्री राधिका में करना ही सर्वोत्तम भक्ति भाव है ।
कृष्णादप्यधिकं प्रेम राधिकायां प्रकुर्वतीम ॥
- सनत्कुमार संहिता (36.186)
शिवजी नारद जी से बोले: श्री राधिका की अनुचरी बनकर श्री राधिका की नित्य सेवा परायण रहकर, श्री कृष्ण से भी अधिक प्रेम श्री राधिका में करना ही सर्वोत्तम भक्ति भाव है ।

