प्रेम दिवाने जो भये, मन भयो चकना चूर ।
छके रहे घूमत रहैं, ‘सहजो’ देखि हज़ूर ॥
- श्री सहजो बाई
सहजोबाई कहती हैं कि जो जीव भगवान के प्रेम में दीवाना हो जाता है उसका मन उन्मत्त अवस्था में रहकर समस्त सांसारिक वासनों को चूर चूर कर देता है। ऐसा जीव प्रेम में छका हुआ सा, प्रेम में डोलता हुआ, भगवान के दर्शन करता रहता है।
छके रहे घूमत रहैं, ‘सहजो’ देखि हज़ूर ॥
- श्री सहजो बाई
सहजोबाई कहती हैं कि जो जीव भगवान के प्रेम में दीवाना हो जाता है उसका मन उन्मत्त अवस्था में रहकर समस्त सांसारिक वासनों को चूर चूर कर देता है। ऐसा जीव प्रेम में छका हुआ सा, प्रेम में डोलता हुआ, भगवान के दर्शन करता रहता है।

