तीरथ सकल लोक बंकुण्ठ तैं,
मधुपुरी अधिक सन्देह नसाँनौं । [1]
तातैं अधिक निकट ब्रज वैभव,
ब्रह्मा वेदन प्रकट प्रमानौं ॥[2]
श्रीबिहारिनिदास निकुंजनि सेवत,
जामैं राधारवन रमाँनौं । [3]
विद्यमान हरि मन्दिर राजतु,
श्रीवृन्दावन रसखान खदाँनौं ॥ [4]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, चौबोला (60)
इसमें कोई संदेह नहीं है कि समस्त तीर्थों से, वैकुण्ठ से भी श्रेष्ठ मथुरा है क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण की जन्म भूमि है । [1]
इससे भी अधिक श्रेष्ठ ब्रज का वैभव है जहां श्री कृष्ण चन्द्र ने अनेक मधुर लीलाएँ की हैं, इसी बात को श्री ब्रह्मा जी ने वेदों में स्पष्ट वर्णन किया है । [2]
श्री नित्य बिहारी बिहारिनी जू के अनन्य दास तो श्री वृंदावन नव निकुंज मंदिर का ही अनन्य सेवन करते हैं जहां प्रिया प्रियतम नित्य विहार करते हैं । [3]
श्री बिहारिन देव जी कहते हैं कि इस धराधाम में श्री वृंदावन धाम, साक्षात रस की ख़ान (एवं सिद्ध खदान) है जो श्री हरि का प्रकट रस मंदिर है । [4]
मधुपुरी अधिक सन्देह नसाँनौं । [1]
तातैं अधिक निकट ब्रज वैभव,
ब्रह्मा वेदन प्रकट प्रमानौं ॥[2]
श्रीबिहारिनिदास निकुंजनि सेवत,
जामैं राधारवन रमाँनौं । [3]
विद्यमान हरि मन्दिर राजतु,
श्रीवृन्दावन रसखान खदाँनौं ॥ [4]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, चौबोला (60)
इसमें कोई संदेह नहीं है कि समस्त तीर्थों से, वैकुण्ठ से भी श्रेष्ठ मथुरा है क्योंकि यह भगवान श्री कृष्ण की जन्म भूमि है । [1]
इससे भी अधिक श्रेष्ठ ब्रज का वैभव है जहां श्री कृष्ण चन्द्र ने अनेक मधुर लीलाएँ की हैं, इसी बात को श्री ब्रह्मा जी ने वेदों में स्पष्ट वर्णन किया है । [2]
श्री नित्य बिहारी बिहारिनी जू के अनन्य दास तो श्री वृंदावन नव निकुंज मंदिर का ही अनन्य सेवन करते हैं जहां प्रिया प्रियतम नित्य विहार करते हैं । [3]
श्री बिहारिन देव जी कहते हैं कि इस धराधाम में श्री वृंदावन धाम, साक्षात रस की ख़ान (एवं सिद्ध खदान) है जो श्री हरि का प्रकट रस मंदिर है । [4]

