तनु की मनु की बचन की, करी अविद्या दूरि ।
कुंजबिहारिनी लाडिली, भरयौ प्रेम भरपूरि ॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (592)
हमारी प्राण-प्यारी कुंज-बिहारिनी श्रीराधिका जू ने हमारे हृदय में सर्वोपरि प्रेम भरकर तन, मन एवं वचनों की समस्त अविद्याओं को दूर कर दिया है।
कुंजबिहारिनी लाडिली, भरयौ प्रेम भरपूरि ॥
- श्री ललितकिशोरी देव, श्री ललितकिशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (592)
हमारी प्राण-प्यारी कुंज-बिहारिनी श्रीराधिका जू ने हमारे हृदय में सर्वोपरि प्रेम भरकर तन, मन एवं वचनों की समस्त अविद्याओं को दूर कर दिया है।

