रथ में बैठे दो जन आज - श्रीरसिक कृष्णमूर्ति सुखराम दास जी

रथ में बैठे दो जन आज - श्रीरसिक कृष्णमूर्ति सुखराम दास जी

रथ में बैठे दो जन आज ।
श्यामा श्याम सलोने प्यारे जो रसिकन सिरताज ॥ [1]
गावत राग मलार सहचरी बाजे बजे मधुर सुरसाज ।
कृष्णमूर्ति सुखराम सहचरी को युगल चरण सो काज ॥ [2]

- श्रीरसिक कृष्णमूर्ति सुखराम दास जी

रसिकों के सिरताज दिव्य दंपति, प्यारे श्री श्यामा श्याम, रथ में विराजमान हैं । [1]

सहचरी सुंदर राग मलार में गा रही हैं एवं सुर ताल से बाजे बजा रही हैं । श्री कृष्णमूर्ति सुखराम जी कहते हैं, "सहचरी को श्यामा श्याम के चरण कमलों के अतिरिक्त अन्य किसी से कोई मतलब नहीं है"। [2]