एवं सिद्धो निर्विकल्पो रतिरुपो रसोवने - श्री वंशीअलि, श्री राधा सिद्धांत (73)

एवं सिद्धो निर्विकल्पो रतिरुपो रसोवने - श्री वंशीअलि, श्री राधा सिद्धांत (73)

एवं सिद्धो निर्विकल्पो रतिरुपो रसोवने ।
कृष्णस्य ललितादीनां हृदयेषु कृत स्थिति ॥

- श्री वंशीअलि, श्री राधा सिद्धांत (73)

श्री राधा का नित्य विहार सुंदर वृंदावन धाम में ही होता है, अत: वहाँ का वास सर्वोपरि है । वहीं पर कृष्ण और लालितादिक के ह्रदय में नित्य सिद्ध निर्विकल्पक रस विद्यमान है ।