ताते वृंदावन बसो वृंदावन लेवो नाम -  श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (99)

ताते वृंदावन बसो वृंदावन लेवो नाम - श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (99)

ताते वृंदावन बसो, वृंदावन लेवो नाम ।
पल छिन कबहूँ जिन तजौ फिर कब पावो धाम ॥

- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (99)

यह मानव देह रूपी अत्यंत दुर्लभ संयोग है, अतः सर्वस्व त्यागकर श्रीवृंदावन का ही आश्रय लो, श्रीवृंदावन नाम का ही सुमिरन करो और एक पल के लिए भी इस रज का परित्याग मत करो; न जाने पुनः कब इस दिव्य धाम का सौभाग्य प्राप्त हो।