जिहि उर सर राधा कमल लस्यौ बस्यौ इहि भाय - ब्रज के दोहे

जिहि उर सर राधा कमल लस्यौ बस्यौ इहि भाय - ब्रज के दोहे

जिहि उर-सर राधा-कमल, लस्यौ बस्यौ इहि भाय।
मोहन-भौंरा रैन-दिन, रहै तहाँ मँडराय॥

- ब्रज के दोहे

जिस भक्त के हृदय-सरोवर में श्रीराधा रूपी कमलिनी सतत प्रफुल्लित रहती है, वहाँ श्रीकृष्ण रूपी चंचल भ्रमर प्रेमासक्त होकर अहर्निश मँडराता रहता है।