शेष ओ सुरेश त्यों गणेश ईश आदि देव - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (28)

शेष ओ सुरेश त्यों गणेश ईश आदि देव - श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (28)

(कवित्त)
शेष ओ सुरेश त्यों गणेश ईश आदि देव,
गावत हैं ब्रह्म पद सर्व सुख देनुरी।
चिंतामणि पाये तें चिंतामणि दूर होत,
कामनाहूँ देत कल्प वृक्ष काम धेनुरी॥ [1]
कोटिन अनेक पद गाये जे पुरान वेद,
एरी सब भले वे मोकों कहा लेनुरी।
केलैं जहं प्रिया लाल कुंजों रसमसे चूर,
मेरी तो जीवन मूर वृन्दावन रेनु री॥ [2]

- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, शिक्षा पत्रिका (28)

शेष, इंद्र, गणेश जी एवं अन्य देवता ब्रह्म पद का गान करते हैं जो सर्व सुख देने वाला है। चिंतामणि से समस्त चिंताओं का निवारण होता है एवं कल्पवृक्ष एवं कामधेनु आदि समस्त कामनाएँ पूर्ण करते हैं। [1]

वेदों में कोटि कोटि पदों का गान किया गया है, वे सब भले हैं परंतु मेरा उनसे क्या लेना देना। मेरा तो जीवन सर्वस्व श्री वृंदावन धाम की रज है जहां मेरे प्रिया लाल [श्री राधा कृष्ण], रस में उन्मत्त होकर, कुंजों में केली पारायण रहते हैं। [2]