आसू कौ हरिदास रसिक हरिवंश न मोहिं बिसारौ ।
यहि पथ चलत स्याम-स्यामा के व्यासहिं बोरौ भावे तारौ ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (80)
अनन्य रसिक संत श्री स्वामी हरिदास जी एवं श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी की कृपा की अभिलाषा है एवं उनके द्वारा दिखाये गए पथ पर ही चलना है क्योंकि मेरे ह्रदय को उनके द्वारा प्रवर्तित श्यामा श्याम की रस उपासना पद्धति भाती है ।
यहि पथ चलत स्याम-स्यामा के व्यासहिं बोरौ भावे तारौ ॥
- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, पूर्वार्ध (80)
अनन्य रसिक संत श्री स्वामी हरिदास जी एवं श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी की कृपा की अभिलाषा है एवं उनके द्वारा दिखाये गए पथ पर ही चलना है क्योंकि मेरे ह्रदय को उनके द्वारा प्रवर्तित श्यामा श्याम की रस उपासना पद्धति भाती है ।

