(राग केदारौ)
प्यारी तेरी बॉफिन बान सुमार लागै भौहें ज्यों धनुष ।
एक ही बार यौं छूटत जैसें बादर बरषत इन्द्र अनख ॥ [1]
और हथियार को गनैं री चाहनि कनख ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी सौं
प्यारी जब तू बोलति चनख चनख ॥ [2]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (37)
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू! आपकी चितवनि अर्थात् पलकें बाण के समान हैं एवं भौंहें धनुष के समान हैं जिसके प्रहार से कोई नहीं बच सकता । यदि एक साथ इस धनुष के बाण छूट जायें तो ऐसा रस बरसता है मानो इंद्र के क्रोध से भयंकर बादल बरसने लगें । [1]
यह तो एक तिरछी नज़र का कमाल है, तुम्हारे अन्य हथियारों की गणना कौन करे, जब श्री हरिदास जी की स्वामिनी (श्यामा प्यारी), श्री कुंज बिहारी से मान करके बोलती हैं, तो उसका तो कहना ही क्या । [2]
प्यारी तेरी बॉफिन बान सुमार लागै भौहें ज्यों धनुष ।
एक ही बार यौं छूटत जैसें बादर बरषत इन्द्र अनख ॥ [1]
और हथियार को गनैं री चाहनि कनख ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी सौं
प्यारी जब तू बोलति चनख चनख ॥ [2]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (37)
श्री कृष्ण श्री राधा से कहते हैं - हे प्यारी जू! आपकी चितवनि अर्थात् पलकें बाण के समान हैं एवं भौंहें धनुष के समान हैं जिसके प्रहार से कोई नहीं बच सकता । यदि एक साथ इस धनुष के बाण छूट जायें तो ऐसा रस बरसता है मानो इंद्र के क्रोध से भयंकर बादल बरसने लगें । [1]
यह तो एक तिरछी नज़र का कमाल है, तुम्हारे अन्य हथियारों की गणना कौन करे, जब श्री हरिदास जी की स्वामिनी (श्यामा प्यारी), श्री कुंज बिहारी से मान करके बोलती हैं, तो उसका तो कहना ही क्या । [2]

