बिना भजन युगलाल के तरै न तरिहैं जान ।
सब रसिकन के वचन को, येही सत्य प्रमाण ॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (25)
समस्त रसिकों के वाक्यों का यही परम सत्य और प्रामाणिक निष्कर्ष है कि श्रीयुगल सरकार के अनन्य एवं निष्काम भजन के बिना इस संसार-सागर से न तो कोई आज तक तरा है और न ही भविष्य में तर पाएगा।
सब रसिकन के वचन को, येही सत्य प्रमाण ॥
- श्री रूप माधुरी, श्री रूप माधुरी जी की वाणी, रसिक पच्चीसी (25)
समस्त रसिकों के वाक्यों का यही परम सत्य और प्रामाणिक निष्कर्ष है कि श्रीयुगल सरकार के अनन्य एवं निष्काम भजन के बिना इस संसार-सागर से न तो कोई आज तक तरा है और न ही भविष्य में तर पाएगा।

