श्यामा जी तेरे चरनन की बलिहारी ॥ [1]
शीतल सुभग कमल ते कोमल, सुन्दर नष छवि न्यारी ।
जिन को सेवत है मनमोहन, अद्भुत खेल खिलारी ॥ [2]
तिन की महिमा विपनराज छवि, तीन लोक उजयारी ।
रसिक जनन विसराम निरन्तर, निसदिन रहत निहारी ॥ [3]
श्री यमुना के तट कुंजन में, विहरत संग सहचारी ।
अली माधुरी के सरबस धन, गौर वरन सुखकारी ॥ [4]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, प्रातः स्मरामि (9)
हे श्यामा जू [श्री राधा], आपके चरणों पर मैं बलिहारी जाता हूँ । [1]
आपके सुंदर चरण शीतलता को प्रदान करते हैं, एवं कमल के फूल से भी अधिक कोमल है जिनकी छवि अति ही न्यारी एवं मनमोहक है । रसिक शिरोमणि श्री श्यामसुन्दर भी आपके चरणों की ही नित्य सेवा करते हैं । [2]
इन चरणों की महिमा के प्रताप से ही श्री वृंदावन धाम की छवि तीनों लोकों में परम उज्जवल है । श्री रसिक भक्तों के ह्रदय का परम विश्राम भी आपके चरण कमल ही हैं जिनको वे सदा निहारते रहते हैं । [3]
श्री यमुना तट के कुंजों में सहचरी के संग सदा यह चरण रहते हैं । श्री अली माधुरी जी कहते हैं कि मेरे जीवन का सर्वस धन, हे प्यारी जू, आपके गोरे वर्ण वाले चरणारविंद ही हैं जो सदा सुखकारी हैं । [4]
शीतल सुभग कमल ते कोमल, सुन्दर नष छवि न्यारी ।
जिन को सेवत है मनमोहन, अद्भुत खेल खिलारी ॥ [2]
तिन की महिमा विपनराज छवि, तीन लोक उजयारी ।
रसिक जनन विसराम निरन्तर, निसदिन रहत निहारी ॥ [3]
श्री यमुना के तट कुंजन में, विहरत संग सहचारी ।
अली माधुरी के सरबस धन, गौर वरन सुखकारी ॥ [4]
- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुञ्ज केली माधुरी, प्रातः स्मरामि (9)
हे श्यामा जू [श्री राधा], आपके चरणों पर मैं बलिहारी जाता हूँ । [1]
आपके सुंदर चरण शीतलता को प्रदान करते हैं, एवं कमल के फूल से भी अधिक कोमल है जिनकी छवि अति ही न्यारी एवं मनमोहक है । रसिक शिरोमणि श्री श्यामसुन्दर भी आपके चरणों की ही नित्य सेवा करते हैं । [2]
इन चरणों की महिमा के प्रताप से ही श्री वृंदावन धाम की छवि तीनों लोकों में परम उज्जवल है । श्री रसिक भक्तों के ह्रदय का परम विश्राम भी आपके चरण कमल ही हैं जिनको वे सदा निहारते रहते हैं । [3]
श्री यमुना तट के कुंजों में सहचरी के संग सदा यह चरण रहते हैं । श्री अली माधुरी जी कहते हैं कि मेरे जीवन का सर्वस धन, हे प्यारी जू, आपके गोरे वर्ण वाले चरणारविंद ही हैं जो सदा सुखकारी हैं । [4]

