भूयादुपत्यकायामधित्त्यकायां गिरे: क्वचिद्‌ वास - श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (5)

भूयादुपत्यकायामधित्त्यकायां गिरे: क्वचिद्‌ वास - श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (5)

भूयादुपत्यकायामधित्त्यकायां गिरे: क्वचिद्‌ वास: ।
यदि मे कृता गुरुणामर्चा भवेन शुद्धेन ॥

- श्री केशवाचार्य, गोवर्द्धन शतक (5)

यदि मैंने अपने जीवन में विशुद्ध भाव से गुरु/भक्तों की निष्काम सेवा की हो तो श्री गिरिराज के निकट भूमि (तलहटी) में कहीं पर मेरा निवास हो ।