श्री राधा के चरन सब, सेवत हित की रीति।
मन-वच-कर्म प्रतीति सौं, उन्हीं में दृढ़ प्रीति॥
- ब्रज के दोहे
मन-वच-कर्म प्रतीति सौं, उन्हीं में दृढ़ प्रीति॥
- ब्रज के दोहे
समस्त सहचरियाँ श्री राधा के चरणों की प्रेमपूर्वक सेवा करती हैं और मन, वचन, एवं कर्म से पूर्ण अनन्यता धारण कर उन्हीं चरणों में अपनी अटूट प्रीति रखती हैं।

