श्री स्वामी हरिदास भजो मन, श्री हरिदास भजौ - श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (9)

श्री स्वामी हरिदास भजो मन, श्री हरिदास भजौ - श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (9)

श्री स्वामी हरिदास भजो मन, श्री हरिदास भजौ ।
औरन के औगुन कहा देखौ, अपनी ओर लजौ ॥

- श्री चतुर दास, श्री चतुर दास जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (9)

श्री चतुर दास जी अपने मन को संबोधित करते हुए कहते हैं कि हे मन, स्वामी हरिदास जी का भजन कर एवं श्री प्रिया प्रियतम के नित्य विहार का अखंड चिंतन कर । दूसरों के अवगुणों का क्या चिंतन करते हो, देखना है तो अपने अवगुणों को देखो, तुम्हें स्वयं को शर्म आजाएगी ।