रसिक सिरोमनी रसिक पिय, जानत रस की रीति - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, ब्रज लीला (131)

रसिक सिरोमनी रसिक पिय, जानत रस की रीति - श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, ब्रज लीला (131)

रसिक सिरोमनी रसिक पिय, जानत रस की रीति ।
प्रभुता राखी दूरि कै, भये दीन बस-प्रीति ॥

- श्री ध्रुवदास, ब्यालीस लीला, ब्रज लीला (131)

रसिक शिरोमणि श्री कृष्ण चन्द्र रस रीति के परम ज्ञाता हैं और उन्होंने प्रभुत्व को त्याग कर प्रेम को महत्व दिया है । तभी तो वे प्रेम के वशीभूत होकर परम दीन हो जाते हैं ।