श्रीगोष्ठेन्द्रसखात्मजाविरचितक्रीडासमूहैवृतं गान्धर्व्वाप्रणयान्धगोकुलविधोरानन्दछन्द प्रदम ।
माधुर्यामृतपूरमद्भुततमं सम्यक सदैवोदिगरच्छीवृन्दाविपिनान्तरंगसुखदं भूयात् कदा मे सरः ॥
- श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (39)
श्री वृषभानुनन्दिनी के द्वारा विरचित क्रीड़ा समूह से व्याप्त, राधिका के प्रेम में उन्मदान्ध, गोकुलचन्द्रमा को आनन्द प्रदान करने वाला यह श्रीराधा कुंड कब मेरे लिये वृंदावन सम्बन्धी अंतरंग सुख को प्रदान करेगा ।
माधुर्यामृतपूरमद्भुततमं सम्यक सदैवोदिगरच्छीवृन्दाविपिनान्तरंगसुखदं भूयात् कदा मे सरः ॥
- श्रीगोवर्द्धन भट्ट, श्री राधाकुण्ड स्तव (39)
श्री वृषभानुनन्दिनी के द्वारा विरचित क्रीड़ा समूह से व्याप्त, राधिका के प्रेम में उन्मदान्ध, गोकुलचन्द्रमा को आनन्द प्रदान करने वाला यह श्रीराधा कुंड कब मेरे लिये वृंदावन सम्बन्धी अंतरंग सुख को प्रदान करेगा ।

