‘नंददास’ सौं नंदसुवन, जौ करुना कीजै ।
तिन भक्तन की पदपंकज रस सो रूचि दीजै ॥
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, श्री कृष्ण सिद्धान्त पंचाध्यायी (138)
हे नंदनंदन,श्री कृष्ण! यदि आप मुझपर करुणा करना चाहते हैं तो मुझे अपने निज भक्तों के चरणों का रस अनुराग प्रदान कीजिए ।
तिन भक्तन की पदपंकज रस सो रूचि दीजै ॥
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली, श्री कृष्ण सिद्धान्त पंचाध्यायी (138)
हे नंदनंदन,श्री कृष्ण! यदि आप मुझपर करुणा करना चाहते हैं तो मुझे अपने निज भक्तों के चरणों का रस अनुराग प्रदान कीजिए ।

