उनकी तलवार चले तो चले -  श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

उनकी तलवार चले तो चले - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’

(सवैया)
उनकी तलवार चले तो चले, तुम गर्दन नीचे किये रहना। [1]
तजना - मधुशाला कदापि नहीं, प्रभु प्रेम का प्याला पिये रहना॥ [2]
यह प्रेम का पन्थ भयानक है, निज हाथ में प्राण लिये रहना। [3]
कहदें मरना तो मरे रहना, कहदें जो जियो तो जिये रहना॥ [4]

- श्री हरे कृष्ण जी

प्रेम के मार्ग को समझाते हुए डंडी स्वामी श्री हरेकृष्णानंद सरस्वती जी कहते हैं — प्रेम के मार्ग पर चाहे प्रियतम तलवार भी चलाए, तब भी तुम विनम्रतापूर्वक सिर झुकाए रहो। [1]

तुम प्रेम का द्वार (मधुशाला) कभी नहीं छोड़ना और प्रेम का प्याला निरंतर पीते रहना। [2]

यह मार्ग कठिनाइयों से भरा है, इसलिए अपने प्राण हथेली पर रखकर चलना ही प्रेम की रीति है। [3]

प्रियतम का आदेश ही जीवन है—वे कहें मरो तो मृत्यु को गले लगा लो, और कहें जियो तो हँसते हुए जी उठो। [4]