माला जपों न कर जपों जिभ्या कहूँ न राम - श्री मलूक दास जी

माला जपों न कर जपों जिभ्या कहूँ न राम - श्री मलूक दास जी

माला जपों न कर जपों, जिभ्या कहूँ न राम ।
सुमिरन मेरा हरि करे, मैं पाया बिसराम ॥

- श्री मालुक दास

न तो मैं माला जपता हूँ, न ही किसी संख्या से भगवान का नाम जप करता हूँ, और न ही जिभ्या से कभी नाम ही लेता हूँ । मैंने श्री हरि की शरणागति प्राप्त कर परम विश्राम पाया है, अब श्री हरि ही मेरा सुमिरन करते हैं ।