(राग विलावल)
श्रीबिहारी प्यारी को खिलौना ।
नाना रूप रंग अंग अंग प्रति, अति रस रसिक सलौना ॥ [1]
अति आसक्त रहत जु छबीली, छैल छबीले सों तन मन रौना ।
सरस लाडिली लाल ख्याल कौ, काहू परति पगौना ॥ [2]
- श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (10)
श्री बाँके बिहारी जी महाराज, नित्य विहारिणी श्री प्यारी जू [श्री राधा] के खिलौने के समान हैं जिनके अंगों से विविध प्रकार के रति रंग-रस उत्पन्न होते हैं जो मन को अति मोहने वाले एवं लावण्य युक्त हैं । [1]
तभी तो हमारी श्री प्यारी जू इनपर सदा आसक्त रहती हैं एवं इनकी छबीली छवि से तन और मन मिलाकर शोभायमान होती हैं । श्री सरस देव जी कहते हैं कि ऐसी कृपा बनी रहे कि ऐसी दिव्य जोड़ी लाड़ली लाल की सरस छवि का चिंतन सदा बना रहे । [2]
श्रीबिहारी प्यारी को खिलौना ।
नाना रूप रंग अंग अंग प्रति, अति रस रसिक सलौना ॥ [1]
अति आसक्त रहत जु छबीली, छैल छबीले सों तन मन रौना ।
सरस लाडिली लाल ख्याल कौ, काहू परति पगौना ॥ [2]
- श्री सरस देव जी, श्री सरस देव जी की वाणी, सरस विहार रस के पद (10)
श्री बाँके बिहारी जी महाराज, नित्य विहारिणी श्री प्यारी जू [श्री राधा] के खिलौने के समान हैं जिनके अंगों से विविध प्रकार के रति रंग-रस उत्पन्न होते हैं जो मन को अति मोहने वाले एवं लावण्य युक्त हैं । [1]
तभी तो हमारी श्री प्यारी जू इनपर सदा आसक्त रहती हैं एवं इनकी छबीली छवि से तन और मन मिलाकर शोभायमान होती हैं । श्री सरस देव जी कहते हैं कि ऐसी कृपा बनी रहे कि ऐसी दिव्य जोड़ी लाड़ली लाल की सरस छवि का चिंतन सदा बना रहे । [2]

