(राग भैरव)
लगैं मोहिं स्वामिनी नीकी ।
मृगनैनी पिकबैनी प्यारी, सुखदायिनि पिय-ही की ॥ [1]
वृंदावन-रानी मनमानी, चूड़ामनि सब ती की ।
कृपा करौ बृषभान-नंदिनी, “ब्रजनिधि” जीवन जी की ॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (21)
मुझे मेरी स्वामिनी श्री राधिका बहुत प्यारी लगती हैं । उनके मृग के समान नैन हैं, कोयल के समान वाणी है, एवं प्रियतम श्री श्यामसुन्दर को सुख दान करने वाली हैं । [1]
मेरी राधे श्री धाम वृंदावन की स्वामिनी हैं जो सब स्त्रियों में चूड़ामणि हैं । श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं कि हे मेरे प्राणों की जीवन धन, वृषभानु नंदिनी! मुझपर अपनी कृपा कीजिए । [2]
लगैं मोहिं स्वामिनी नीकी ।
मृगनैनी पिकबैनी प्यारी, सुखदायिनि पिय-ही की ॥ [1]
वृंदावन-रानी मनमानी, चूड़ामनि सब ती की ।
कृपा करौ बृषभान-नंदिनी, “ब्रजनिधि” जीवन जी की ॥ [2]
- श्री ब्रज निधि जी, ब्रज निधि ग्रंथावली, ब्रजनिधि पद संग्रह (21)
मुझे मेरी स्वामिनी श्री राधिका बहुत प्यारी लगती हैं । उनके मृग के समान नैन हैं, कोयल के समान वाणी है, एवं प्रियतम श्री श्यामसुन्दर को सुख दान करने वाली हैं । [1]
मेरी राधे श्री धाम वृंदावन की स्वामिनी हैं जो सब स्त्रियों में चूड़ामणि हैं । श्री ब्रजनिधि जी कहते हैं कि हे मेरे प्राणों की जीवन धन, वृषभानु नंदिनी! मुझपर अपनी कृपा कीजिए । [2]

