नृपति निकुंज विहारनि रानी ।
ललित सचिव परिकर जन सेना,
परिचारक किशोर वर मानी ॥ [1]
राजत सदा छत्र सिंघासन,
सुख बरसत वृंदावन रजधानी ।
काम केलि बकसत लालन को,
यह सुख बिलखि जै श्री वंशी अलि बलि बलि जानी ॥ [2]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (18)
निकुंज की महाराज श्री निकुंज बिहारिनी श्री राधा हैं । ऐसे निकुंज की श्री ललिता जी मंत्री हैं जिनके विभिन्न परिकरों की सेना है और वहाँ के सेवक श्री लालजी (कृष्ण) हैं । [1]
श्री किशोरी जी के सिर पर सदा छत्र विराजमान रहता है और राजधानी श्री वृंदावन धाम में वे सदा सुख बरसाती हैं । ऐसी निकुंज विहारिणी श्यामा जू, श्री लालजी को केलि रस का दान करती हैं जिसके सुख पर श्री वंशी अलि जी बलिहारी जाते हैं । [2]
ललित सचिव परिकर जन सेना,
परिचारक किशोर वर मानी ॥ [1]
राजत सदा छत्र सिंघासन,
सुख बरसत वृंदावन रजधानी ।
काम केलि बकसत लालन को,
यह सुख बिलखि जै श्री वंशी अलि बलि बलि जानी ॥ [2]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (18)
निकुंज की महाराज श्री निकुंज बिहारिनी श्री राधा हैं । ऐसे निकुंज की श्री ललिता जी मंत्री हैं जिनके विभिन्न परिकरों की सेना है और वहाँ के सेवक श्री लालजी (कृष्ण) हैं । [1]
श्री किशोरी जी के सिर पर सदा छत्र विराजमान रहता है और राजधानी श्री वृंदावन धाम में वे सदा सुख बरसाती हैं । ऐसी निकुंज विहारिणी श्यामा जू, श्री लालजी को केलि रस का दान करती हैं जिसके सुख पर श्री वंशी अलि जी बलिहारी जाते हैं । [2]

