यथा ब्रह्मस्वरूपश्च श्रीकृष्ण: प्रकृते: पर: - नारद पंचरात्र (2.3.51)

यथा ब्रह्मस्वरूपश्च श्रीकृष्ण: प्रकृते: पर: - नारद पंचरात्र (2.3.51)

यथा ब्रह्मस्वरूपश्च श्रीकृष्ण: प्रकृते: पर: ।
तथा ब्रह्मस्वरूपा च निर्लिप्ता प्रकृते: परा ॥

- नारद पंचरात्र (2.3.51)

भगवान शिव नारद मुनि से कहते हैं - जैसे ब्रह्मस्वरूप श्रीकृष्ण प्रकृति से परे हैं, उसी प्रकार राधा भी ब्रह्मस्वरूपिणी, निर्लिप्ता तथा प्रकृति से परे हैं ।