भक्ति साधारन जगत में, हरि कीनों सिष्टाचार ।
श्रीबिहारीदास हरिदास कै, इक रस वैस बिहार ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (362)
श्रीहरि ने जगत में अवतार ले-लेकर सृष्टि अनुसार अनेक प्रकार की भक्ति एवं रसों का विस्तार किया है। साधारनतया भक्त प्रायः उसी अनुसार भक्ति करता है। परंतु हमारे श्रीस्वामी हरिदास जू महाराज (ललिता सखी अवतार) का अनादिकाल से रसवैस का सर्वोपरि नित्यबिहार ही है, जिनकी अनन्य उपासना एकमात्र नित्यबिहार ही श्री बिहारिन दास जी की भी उपासना है ।
श्रीबिहारीदास हरिदास कै, इक रस वैस बिहार ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (362)
श्रीहरि ने जगत में अवतार ले-लेकर सृष्टि अनुसार अनेक प्रकार की भक्ति एवं रसों का विस्तार किया है। साधारनतया भक्त प्रायः उसी अनुसार भक्ति करता है। परंतु हमारे श्रीस्वामी हरिदास जू महाराज (ललिता सखी अवतार) का अनादिकाल से रसवैस का सर्वोपरि नित्यबिहार ही है, जिनकी अनन्य उपासना एकमात्र नित्यबिहार ही श्री बिहारिन दास जी की भी उपासना है ।

