(राग सोरठ व विहाग)
धर मन राधिका पद ध्यान ।
जिन्हें सेवत कुंज में नित, रसिक श्याम सुजान ॥ [1]
सतत चिंतत शंभु अज जिहि, सकल सुख की ख़ान ।
भनत महिमा अमित जिनकी, शास्त्र वेद पुराण ॥ [2]
अष्ट द्वै अंगुष्ठ अँगुरी, गनित दस अनुमान ।
देत दसधा भक्ति जो नित, करहि अनुसंधान ॥ [3]
चन्द्र नख की चन्द्रिका सों, हरत हिय तम जान ।
कंज ते कोमल कलित जो, 'सरस' जीवन प्रान ॥ [4]
- श्री सरस माधुरी
अरे मन, श्री राधिका के चरण कमलों का ध्यान कर जिनकी सेवा रसिक चूड़ामणि भगवान श्री कृष्ण भी सदा करते हैं । [1]
ऐसे श्री चरण समस्त सुखों की ख़ान हैं जिनका ध्यान नित्य भगवान शिव एवं ब्रह्मा भी करते हैं । शास्त्र, वेद एवं पुराण भी जिनकी अगाध महिमा गाते नहीं थकते । [2]
आठ उंगलियों और दो अंगूठों के साथ, जो मिलकर दस बनाते हैं, सदा दस प्रकार की भक्ति प्रदान करते हैं, जो भी अनुसंधान (खोजता) करता है । [3]
इन श्री चरणों के नख चन्द्र की चाँदनी से ह्रदय के मोह रूपी अंधकार का नाश होता है ।श्री सरस माधुरी जी कहते हैं, “पुष्पों से भी कोमल, एवं सौंदर्यपूर्ण, यह श्री राधा जू के श्री चरण ही मेरे जीवन प्राण हैं”। [4]
धर मन राधिका पद ध्यान ।
जिन्हें सेवत कुंज में नित, रसिक श्याम सुजान ॥ [1]
सतत चिंतत शंभु अज जिहि, सकल सुख की ख़ान ।
भनत महिमा अमित जिनकी, शास्त्र वेद पुराण ॥ [2]
अष्ट द्वै अंगुष्ठ अँगुरी, गनित दस अनुमान ।
देत दसधा भक्ति जो नित, करहि अनुसंधान ॥ [3]
चन्द्र नख की चन्द्रिका सों, हरत हिय तम जान ।
कंज ते कोमल कलित जो, 'सरस' जीवन प्रान ॥ [4]
- श्री सरस माधुरी
अरे मन, श्री राधिका के चरण कमलों का ध्यान कर जिनकी सेवा रसिक चूड़ामणि भगवान श्री कृष्ण भी सदा करते हैं । [1]
ऐसे श्री चरण समस्त सुखों की ख़ान हैं जिनका ध्यान नित्य भगवान शिव एवं ब्रह्मा भी करते हैं । शास्त्र, वेद एवं पुराण भी जिनकी अगाध महिमा गाते नहीं थकते । [2]
आठ उंगलियों और दो अंगूठों के साथ, जो मिलकर दस बनाते हैं, सदा दस प्रकार की भक्ति प्रदान करते हैं, जो भी अनुसंधान (खोजता) करता है । [3]
इन श्री चरणों के नख चन्द्र की चाँदनी से ह्रदय के मोह रूपी अंधकार का नाश होता है ।श्री सरस माधुरी जी कहते हैं, “पुष्पों से भी कोमल, एवं सौंदर्यपूर्ण, यह श्री राधा जू के श्री चरण ही मेरे जीवन प्राण हैं”। [4]

